🔹बुरा मत देखो, बुरा मत बोलो और बुरा न सुनो..

🔸गांधीवादी मूल्यों को अपनाने का समय..!

✒️संजय वर्मा-गोरखपूर, चौरा चौरी(प्रतिनिधी)मो:-9235885830

गोरखपूर(दि.2ऑक्टोबर):-उक्त बातें सृष्टि धर्मार्थ सेवा संस्थान के प्रबंधक संजू वर्मा ने अपने आवास सृष्टि रोड वार्ड नंबर 6 मुंडेरा बाजार पर कहींमहात्मा गांधी की तीन बातें आज भी दुनिया को एक अच्छी सच्ची राह की ओर अग्रसर कर सकती हैं। व तीन बातें हैं- बुरा मत देखो, बुरा मत बोलो और बुरा न सुनो। लेकिन अफसोस आज महात्मा गांधी के देश में ही इन बातों के विरुद्ध लगभग लोग चल रहे।

गांधीजी के आदर्श सामाज और दुनिया को एक अच्छी राह पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं व देशप्रेमी ही नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव जंतुओं की रक्षा के प्रति अहिंसा प्रेमी भी थे,ऐसे ही नहीं दुनिया मोहन दास करमचंद को महात्मा गांधी के नाम से पुकारती है या फिर ऐसे ही उन्हें ‘महात्मा’ की उपाधि नहीं मिल गई थी

आज भारत में बहुत से ऐसे लोग भी है, जिन्हें आजादी की पकी-पकाई खीर मिली है,व गांधी की अहिंसा की राह चलते हुए आजादी दिलवाने के नाम पर ही सवाल खड़े कर देते हैं, महात्मा गांधी ने अहिंसा की राह चलते हुए भारतीयों को आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए एकजुट किया था। आज अगर हरेक भारतीय,चाहे वह सत्ताधारी हो, राजनेता या अभिनेता या फिर आम आदमी हो,महात्मा गांधी की बातों का अनुसरण करे तो देश में राजनीति के गिरते स्तर में सुधार हो जाए और पर्यावरण संभालने के प्रति लोग गंभीर हो जाएं,लेकिन आज स्वार्थ लगभग सभी लोगों के सिर के ऊपर चढ़ चुका है,महात्मा गांधी सभी पंथों का सम्मान करते थे, व इसीलिए कहते थे कि ईश्वर अल्लाह तेरे नाम सबको सन्मति दे भगवान।

उन्होंने हर धर्म, जाति को आपस में जोड़ने का काम किया था।
आज जिस तरह दुनिया हिंसा, नफरत, वैर-विरोध, स्वार्थ जैसी व्याधियों के दलदल में धंसती जा रही है, वह जरा भी उचित नहीं है। इन व्याधियों को जड़ से उखाड़ने के लिए दुनिया को गांधीवादी मूल्यों को अपनाने का समय आ चुका है। लेकिन अफसोस इस बात का है कि बापू के देश के लोग ही उनके नाम की माला तो जपते हैं, लेकिन उनके मूल्यों को दरकिनार कर रहे हैं।

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