तार-तार हो चुका ‘चेहरा’ विनाशी संघ का…!

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चिल्ला-चिल्लाकर संभ्रमित संघी पात्र वो बोला
चुनाव मे क्या चेहरा उतारोगे
चेहरा PM का जैसे पास हमारे
है कोई चेहरा ऐसा पास तुम्हारे

‘चेहरे’ की तो कोई बात नही भारत के आईन मे
काम देख जनता सांसद चुने जो बनायें मंत्रिमंडल अपने हिसाब से
मंत्रिमंडल फिर नेता चुने PM जो कहलाये
राजनीतिक जनतंत्र की यह बुनियाद देश का आईन सिखलाये

राजनीतिक जनतंत्र की यह बुनियाद पर संघीयो को ना भाये
तभी तो PM का एक ‘चेहरा’ दिखा वह सांसद चुनवाये
सांसद चाहे हो कितना भी गिरा वो ‘चेहरा’ देख जनता उसपे मुहर लगाये
देखो अपनी गंगा संघी कैसे उलटी बहांये

संघी अपनी गंगा उलटी बहाये
चुंकी जनतंत्र नही एकतंत्र वह चाहे
हां..हां वही एकतंत्र मुसोलिनी औ हिटलर वाला
कबर मे है जिसे आवाम ने डाला

कबर से एकतंत्र है बाहर निकालना
और देश मे तानाशाही लाना
मंशा सौ साल पुरानी संघ परिवार की
हकीकत मे लाने ‘चेहरे’ का बहाना

संघी है हिंमत तो देख अपना ‘चेहरा’
देश के ‘आईन’ के आईने मे
उपर से गंभीर और शांत चेहरा तेरा
हकीकत मे कितना खूखांर है

गिरफ्त पुंजीपतीयो के हाथ वो चेहरा
सना किसानों के खून से है
सरकारी कर्मियो को बरबाद करता
खोंखला रहा पुरे देश को है

धर्म का उन्मादी वो चेहरा
हिंदू-मुस्लिम फसाद पे पलता है
गोध्रा प्रयोगशाला के बलबुते ही तो
बना संघीयो की आँखो का तारा है

विज्ञान का दुश्मन यह चेहरा
लंबी-लंबी हाँके है
गटर की गॅस पर चूल्हा जलायें
करोना भगाने ताली औ थाली बजवायें है

संघी हंसी आती बात पर तेरे जब तु कहे
चेहरा इमानदार तेरा क्योंकि वह बेऔलाद है
दुनिया थुंके जिसपर आज
वो हिटलर भी मरा बेऔलाद बे

और यह भी जान ले तु संघी
चाहे जितना इतरा इस विनाशी चेहरे पर
लाने तानाशाही जो तूने चुना है
तेरा ही वाजपेयी कहे ‘कलंक’ जिसे
तार-तार हो चुका सारी दुनिया मे वो ‘चेहरा’ है…

तार-तार हो चुका सारी दुनिया मे वो ‘चेहरा’ है…

✒️लेखक:-मिलिंद भवार(पँथर्स)मो:-9833830029
03 ऑगस्ट 2021