महानायक अमर शहीद बाबू बंधू सिंह के वंशज अजय कुमार सिंह टप्पू भैया जी के द्वारा समस्त क्षेत्रवासियों से अपील

✒️संजय वर्मा-गोरखपूर,चौरा चौरी(प्रतिनिधी)मो:-9235885830

गोरखपूर(दि.11ऑगस्ट):-कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के चलते1857 समर के महानायक अमर शहीद बाबू बंधू सिंह के बलिदान दिवस 12 अगस्त दिन बुधवार 2020 को162 वी पुण्यतिथि अपने अपने घरों में सादगी के साथ मनाएं
बंधू सिंह की ये है कहानी –
1857 में ब्रितानी हुकूमत के खिलाफ भड़के जनविद्रोह की अगुवाई पूर्वांचल में डुमरी रियासत के बाबू बंधू सिंह ने की। उस समय वह 24 वर्ष के थे। उस समय यह इलाका अकाल की गिरफ्त में था लेकिन अंग्रेज अपने ऐशो-आराम में व्यस्त था। बंधू सिंह ने अपने साथियों के साथ बिहार से आ रहा सरकारी खजाना लूटकर अकाल पीड़ितों में बांट दिया। उनके एक हमले में उस समय गोरखपुर के कलेक्टर मारे गए। बंधू सिंह ने घाघरा और गंडक नदियों पर कब्जा कर अंग्रेजों की सप्लाई लाइन तोड़ दी। तब अंग्रेजों ने नेपाल के राजा से मदद मांगी। नेपाल के राजा ने अपने प्रधान सेनापति पहलवान सिंह को फौज के साथ भेजा। पहलवान सिंह लड़ाई में मारा गया लेकिन बंधू सिंह को जंगलों में शरण लेनी पड़ी। अंग्रेजों ने डुमरी रियासत पर तीन तरफ से हमला किया। मोतीराम के पूरब दुबियारी पुल के पास बंधू सिंह के भाइयों करिया सिंह, हम्मन सिंह, तेजई सिंह और फतेह सिंह ने अंग्रेजों से कड़ा मुकाबला किया लेकिन अंत में वीर गति को प्राप्त हुए। अंग्रेजों ने बंधू सिंह की हवेली को आग के हवाले कर दिया। उनकी रियासत को तोहफे के तौर पर मुखबिरों में बांट दिया।

तरकुलहा में लगता है मेला
कहते हैं कि बंधू सिंह जंगलों में रहते और अंग्रेज सिपाहियों को मौत के घाट उतार देते थे। तरकुलहा देवी मंदिर के पास तरकुल के पेड़ के नीचे मिट्टी की पिंडी बनाकर देवी की उपासना करते थे। यहीं पर मां के चरणों में अंग्रेजों के सिर चढ़ाते और अंग्रेजों से लड़ने की शक्ति मांगते थे। घबड़ाकर अंग्रेजों ने अपने मुखबिरों के तंत्र को सक्रिय कर दिया। अंतत: बंधू सिंह पकड़े गए। 12 अगस्त 1858 को अलीनगर चौराहे पर स्थित बरगद के पेड़ पर उन्हें सरेआम फांसी दी गई। जनश्रुतियों के मुताबिक बंधू सिंह के गले का फंदा छह बार टूटा। सातवीं बार जब फंदा उनके गले में डाला गया तो उन्होंने अपनी आराध्य तरकुलहा देवी से प्रार्थना की कि वह उन्हें मुक्त करें। इसके बाद अंग्रेज उन्हें फांसी देने में सफल रहे।

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