कुसमुंडा में कोयला की आर्थिक नाकाबंदी सफल, भूविस्थापितों ने खदान और सायलो पर किया कब्जा, एसईसीएल को करोड़ों का नुकसान, 21 को होगी त्रिपक्षीय वार्ता

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🔸Economic blockade of coal in Kusmunda successful, displaced people captured the mine and silo, SECL suffered a loss of crores, tripartite talks will be held on 21st

✒️कोरबा(पुरोगामी न्यूज नेटवर्क)

कोरबा(दि.12सप्टेंबर):- अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा, भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ और भूविस्थापितों के अन्य संगठनों के आह्वान पर कल सुबह से जारी कोयला की आर्थिक नाकाबंदी आज शाम 4 बजे तक लगभग 36 घंटे चली और जबरदस्त रूप से सफल रही।आंदोलन को तोड़ने और नेताओं को डराने-धमकाने की तमाम कोशिशों के असफल होने के बाद आखिरकार एसईसीएल प्रबंधक को झुकना पड़ा और जिला प्रशासन की मध्यस्थता में 21 सितम्बर को आंदोलनकारियों की तमाम मांगों पर बातचीत के लिए सहमत होना पड़ा। इस आंदोलन के कारण कोयले की ढुलाई करने वाले 4000 से ज्यादा ट्रकों के पहिये थम गए और दूसरे दिन साइलो बंद होने से ट्रेन लोडिंग भी प्रभावित हुआ, क्योंकि आंदोलनकारियों ने कोयला खदानों और सायलो पर ही कब्जा जमा लिया था। इसके चलते एसईसीएल को इन दो दिनों में सैकड़ों करोड़ रुपयों का नुकसान पहुंचने का अंदेशा है।

आंदोलन में कोरबा जिले के चारों क्षेत्र कोरबा, कुसमुंडा, गेवरा, दीपका क्षेत्र के भू-विस्थापित शामिल थे। कल उन्होंने हजारों की संख्या में कुसमुंडा महाप्रबंधक कार्यालय के सामने एकत्रित होकर रैली निकाली, आम सभा की और उसके बाद खदान से निकलने वाले तीनों रास्तों को और सायलो को योजनाबद्ध ढंग से बंद कर दिया। आर्थिक नाकेबंदी को सफल बनाने के लिए गांव-गांव में चावल-दाल संग्रहण, मशाल जुलूस और अधिकार यात्रा निकालकर नुक्कड़ सभा और पर्चों के जरिये अभियान चलाया जा रहा था। इस आंदोलन को शुरू से ही मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने समर्थन दिया है और बड़ी संख्या में माकपा कार्यकर्ता भी आंदोलन में शामिल हुए।

उल्लेखनीय है कि रोजगार, पुनर्वास, पुनर्वास गांवों में काबिज भू-विस्थापितों को पट्टा और अनुपयोगी भूमि की मूल किसानों को वापसी से जुड़ी मांगों पर पिछले दो सालों से यहां आंदोलन चल रहा है। आंदोलन के दबाव में एसईसीएल प्रबंधन भूविस्थापितों को आश्वासन तो देता रहा है, लेकिन उस पर उसने कभी अमल नहीं किया। इससे ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ गया है। किसान सभा की पहलकदमी के बाद इस क्षेत्र में भूविस्थापितों के छोटे-बड़े सभी संगठन एकजुट हो गए हैं और उन्होंने आर्थिक नाकाबंदी का आह्वान किया था। इस आह्वान पर खनन प्रभावित 54 गांवों के हजारों ग्रामीण सड़कों पर उतर गए और आंदोलन के दूसरे दिन उन्होंने 8 किमी. लंबे कोयला खदान के अंदर जाकर सतर्कता चौक और सायलो, (जहां से ट्रेनों में परिवहन के लिए कोयला भरा जाता है और साइडिंग में जाता है) पर भू विस्थापितों ने कब्जा जमा लिया था। इस आंदोलन में महिलाएं भी अपने बच्चों को लेकर भारी संख्या में शामिल थी और रात उन्होंने सड़कों पर ही गुजारी। इससे एसईसीएल प्रबंधन की रात में कोयला परिवहन की योजना भी असफल हो गई। आंदोलनकारियों के पक्ष में जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद 21 सितम्बर को त्रिपक्षीय वार्ता की सहमति बनी और 36 घंटे के बाद कोल परिवहन शुरू हो पाया।

छत्तीसगढ़ किसान सभा और भू विस्थापित रोजगार एकता संघ ने एक साझा बयान में कोयला की आर्थिक नाकेबंदी को सफल बनाने के लिए क्षेत्र के मजदूर-किसानों, नागरिकों, ग्रामीण जनता और व्यापारी वर्ग का आभार प्रकट किया है। उन्होंने कहा है कि यदि 21 सितम्बर को रोजगार और पुनर्वास के सवाल पर प्रबंधन सही रूख नहीं अपनाता, तो फिर से उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।

माकपा के जिला सचिव प्रशांत झा ने कहा कि रोजगार और पुनर्वास की कीमत पर और ग्रामीणों की लाशों पर एसईसीएल प्रबंधन को मुनाफा कमाने नहीं दिया जाएगा और सार्वजनिक क्षेत्र के नाते सामाजिक कल्याण की जिम्मेदारी को पूरा करने उसे मजबूर किया जाएगा।

किसान सभा के नेता जवाहर सिंह कंवर और दीपक साहू, माकपा पार्षद राजकुमारी कंवर और भू-विस्थापितों के संगठनों से जुड़े नेताओं शिवदयाल कंवर, सुभद्रा कंवर, बसंत चौहान, विजय कंवर, देव कुंवर कंवर, संजय यादव, दामोदर श्याम, रेशम यादव, रघु, दीनानाथ, जय कौशिक, सुमेंद्र सिंह ठकराल, देव पटेल, जयपाल कंवर, अजय पटेल, बलराम यादव, राजू यादव, कोमल खरे, भीर सिंह, संतोष राठौर, दिलहरण दास, बृजेश श्रीवास ने आंदोलन का नेतृत्व किया।

भू-विस्थापितों के 11 सूत्रीय मांगपत्र में भूमि अधिग्रहण से प्रभावित सभी छोटे-बड़े खातेदारों को बिना शर्त स्थायी रोजगार देने, अनुपयोगी अर्जित भूमि को मूल खातेदारों को वापस करने और नई पुनर्वास नीति के अनुसार मुआवजा और अन्य लाभ देने, आउटसोर्सिंग कार्यों में भू-विस्थापितों एवं खनन प्रभावित गांवों के बेरोजगारों को प्राथमिकता के साथ रोजगार उपलब्ध कराने, ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार योजना के तहत रोजगार उपलब्ध कराने, पुनर्वास गांवों में बुनियादी मानवीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांगें प्रमुख हैं।

 

*Economic blockade of coal in Kusmunda successful, displaced people captured the mine and silo, SECL suffered a loss of crores, tripartite talks will be held on 21st*

Korba.- The economic blockade of coal, which started from yesterday morning on the call of All India Kisan Sabha affiliated Chhattisgarh Kisan Sabha, Rojgar Ekta Sangh and other organizations of land displaced people, lasted for about 36 hours till 4 pm today and was tremendously successful. After all the efforts to break the movement and intimidate the leaders failed, finally the SECL management had to bow down and agree to talks on all the demands of the agitators on September 21 with the mediation of the district administration. Due to this agitation, the wheels of more than 4000 trucks transporting coal stopped and train loading was also affected due to closure of silos on the second day, because the agitators had captured the coal mines and silos. Due to this, SECL is likely to suffer a loss of hundreds of crores of rupees in these two days.

The land displaced people of Korba, Kusmunda, Gevra and Deepka areas of Korba district were participated in the movement. Yesterday, thousands of people gathered in front of the Kusmunda General Manager’s office and took out a rally, held a big mass meeting and then systematically closed all three exits from the mine and the silos. To make the economic blockade successful, a campaign was being conducted through street meetings, pamphlet distribution, by rice-pulse collection, taking out torch procession and Adhikar Yatra in every village. This movement has been supported by the CPI(M) since the beginning and a large number of CPI(M) workers also joined the movement.

It is noteworthy that the movement has been going on here for the last two years on the demands related to employment, rehabilitation, lease to the land displaced people occupying resettlement villages and return of unusable land to the original farmers. Under the pressure of the movement, SECL management has been giving assurances to the displaced people, but never implemented. This has increased the anger of the villagers. After the initiative of Kisan Sabha, all small and big organizations of land displaced people in this area have united and called for an economic blockade. On this call, thousands of villagers from 54 mining affected villages took to the streets and on the second day of the movement, silos (where coal is loaded for transportation in trains and taken to the siding) and 8KM. long coal mine area were captured by the displaced people. Women also participated in this movement in large numbers along with their children and they spent the night on the streets. Due to this, SECL management’s plan to transport coal at night also failed. After the intervention of the district administration in favour of the agitators, an agreement was reached for tripartite talks on 21 September and coal transportation could start after 36 hours.

In a joint statement, Chhattisgarh Kisan Sabha and Bhoo-visthapit Rojgar Ekta Sangh have expressed gratitude to the workers, farmers, citizens, rural people and business class of the area for making the economic blockade of coal successful. They have said that if the management does not take the right stand on the question of employment and rehabilitation on September 21, then a fierce agitation will be launched again.

CPI(M) District Secretary Prashant Jha said that SECL management will not be allowed to earn profits at the cost of employment and rehabilitation and on the dead bodies of villagers and as a public sector, it will be forced to fulfill its responsibility of social welfare.

Kisan Sabha leaders Jawahar Singh Kanwar and Deepak Sahu, CPI(M) councilor Rajkumari Kanwar and leaders associated with land-displaced organizations Shivdayal Kanwar, Subhadra Kanwar, Basant Chauhan, Vijay Kanwar, Dev Kunwar Kanwar, Sanjay Yadav, Damodar Shyam, Resham Yadav, Raghu. , Dinanath, Jai Kaushik, Sumendra Singh Thakral, Dev Patel, Jaipal Kanwar, Ajay Patel, Balram Yadav, Raju Yadav, Komal Khare, Bhir Singh, Santosh Rathore, Dilharan Das, Brijesh Sriwas led the movement.

The 11-point charter demand of the land displaced includes providing unconditional permanent employment to all small and big account holders affected by land acquisition, returning the unused acquired land to the original holders and giving compensation and other benefits as per the new rehabilitation policy including land rights, to provide employment to displaced and unemployed people of mining affected villages on priority basis, to provide employment to rural women under self-employment scheme, to provide basic human facilities in rehabilitation villages etc.