सरकार की अदूरदर्शिता आम जनता, गरीबों और कमजोर वर्गों के लिए हो रही विपत्ति साबित

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🔸आलू, प्याज, टमाटर के मूल्यों में बेतहाशा वृद्धि,गरीब वर्ग पर पढ़ती मार

✒️संजय वर्मा-गोरखपूर,चौरा चौरी(प्रतिनिधी)मो:-9235885830

गोरखपूर(दि.4नोव्हेंबर):-उक्त बातें सृष्टि धर्मार्थ सेवा संस्थान के प्रबंधक संजू वर्मा ने अपने आवास मुंडेरा बाजार चौरीचौरा सृष्टि रोड वार्ड नंबर 6 पर कही। हम हर साल प्याज,आलू आदि के दामों में कुछ समय के लिए बेतहाशा वृद्धि देखते हैं, लेकिन सरकार छापेमारी कर जमाखोरों को पकड़ती है, देश में स्टॉक कम होने पर निर्यात पर रोक लगा दिया जाता है और आयात को प्रोत्साहित किया जाता है।

मगर वर्तमान सरकार ने नए कृषि कानून के माध्यम से जमाखोरी को वैध बना दिया, जिसकी वजह से प्याज और आलू समेत अनेक खाद्य पदार्थों के मूल्यों में बेतहाशा वृद्धि हुई है इसकी वजह से प्याज के दामों में भी वृद्धि हुई थी, लेकिन आनन-फानन में सरकार ने जमाखोरी की अधिकतम सीमा दो टन तय किया। सवाल है कि आलू की कीमत पिछले ग्यारह सालों के उच्चतम स्तर पर है, मगर क्या इसका लाभ किसानों को मिल रहा है?

इसका उत्तर है, छोटे किसानों को बिल्कुल नहीं, क्योंकि वे न तो कोल्ड स्टोरेज यानी शीत भंडारों में आलू रखने में सक्षम है और न ही बाजार के जोखिम उठाने के लिए सशक्त। और भारत में नब्बे फीसद किसान छोटे और सीमांत किसान हैं। इसका एकमात्र फायदा बड़े किसानों और उद्योगपतियों को हो रहा है।

राज्य का कर्त्तव्य होता है सभी के हितों की रक्षा करना और समाज में सामंजस्य स्थापित करना, लेकिन सरकार की अदूरदर्शिता आम जनता, विशेषकर गरीबों और कमजोर वर्गों के लिए विपत्ति साबित हो रही है । आलू, प्याज, टमाटर भारतीय समाज में आधारभूत आवश्यकताएं हैं और इसके मूल्यों में बेतहाशा वृद्धि देश में भुखमरी को बढ़ाएगा। वैश्विक स्तर पर भुखमरी सूचकांक में हमारे देश की क्या हालत है, यह जगजाहिर है।