कुछ बुराइयों से आखिर हमें कब आजादी मिलेगी ?

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    ✒️संजय वर्मा-गोरखपूर,चौरा चौरी(प्रतिनिधी)मो:-9235885830

    🔸सृष्टि धर्मार्थ सेवा संस्थान के प्रबंधक संजू वर्मा ने आज 15 अगस्त के दिन कहा कि नेता,अभिनेता,सत्ताधारी या फिर कोई भी नागरिक,चाहे किसी भी धर्म या जाति का ही क्यों न हो,अपने स्वार्थ की भावना को होगा छोड़ना..

    🔹देश पर शहीद होने वाले देशभक्तों की कुर्बानियों को हमे याद करना चाहिए और दिल में देशभक्ति की भावना भरनी चाहिए..

    देश को अंग्रेजों से आजाद हुए एक लंबा अरसा बीत चुका है। इस बीच देश ने विभिन्न क्षेत्रों में बहुत तरक्की भी की, लेकिन आज भी मजदूरों-मजबूरों का शोषण हो रहा है, भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है। कुछ सताधारी-राजनेता लोकतंत्र के विरुद्ध चल रहे तो कुछ लोग अपनी कुर्सी और धन की ताकत का दुरुपयोग करके अपना स्वार्थ पूरा कर रहे! आजाद देश में लड़कियां सुरक्षित महसूस नहीं कर रही! इन सब बुराइयों से आखिर हमें कब आजादी मिलेगी? आज बहुत से लोग सिर्फ अपना स्वार्थसिद्ध करने में लगे हैं।देश को आजाद कराने के लिए जिन शहीदों ने अपना सब कुछ बिना किसी स्वार्थ के देश पर कुर्बान कर दिया, उन महान देशभक्तों की कुर्बानियों को याद करने का किसी के पास समय नहीं है। समय कैसे हो और उन शहीदों की कुर्बानियां कैसे याद आएं? आखिर आज सबको आजादी की पकी-पकाई खीर जो मिल गई है! 15 अगस्त के दिन हम सभी को देश पर शहीद होने वाले देशभक्तों की कुर्बानियों को याद करना चाहिए और दिल में देशभक्ति की भावना भरनी चाहिए।
    यों तो हर साल इस दिन देश के विभिन्न स्थानों पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें कई सत्ताधारी और राजनेता लोग बड़े-बड़े भाषण देशहित और जनहित के लिए देते हैं। उसमें देश में फैली समस्याओं को समाप्त करने का जिक्र भी होता है। अगर इन बातों को भाषणों तक ही सीमित न रख कर हकीकत में भी अपनाया जाए तो देश बहुत सारी समस्याओं से मुक्त हो जाए और विश्व के सब देशों से ज्यादा अमीर और खुशहाल हो जाए।जब तक देश के हर गरीब को दो वक्त की भरपेट रोटी, सिर ढकने के लिए छत और हर गरीब के बच्चे को आधुनिक और उचित शिक्षा का इंतजाम नहीं हो जाता, तब तक देश की आजादी का जश्न अधूरा है! भारत को हर समस्या से मुक्त करना है तो देश के हरेक नागरिक, चाहे वह नेता हो, अभिनेता हो, सत्ताधारी हो या फिर कोई भी नागरिक, चाहे किसी भी धर्म या जाति का ही क्यों न हो, अपने स्वार्थ की भावना को छोड़ना होगा और यह संकल्प लेना होगा कि हम राष्ट्रधर्म की भावना अपने अंदर भरें।